
गाने का विवरण
मिथिला विवाह में कोहबर गीत विशेष स्थान रखते हैं। कोहबर घर वह कक्ष होता है जहाँ विवाह के बाद दूल्हा-दुल्हन पहली बार एक साथ बैठते हैं और वैवाहिक जीवन का शुभारंभ करते हैं। इस अवसर पर गाए जाने वाले गीत को कोहबर गीत कहा जाता है। गीतों में श्रृंगार, शुभकामना और पारिवारिक आनंद का अद्भुत समन्वय मिलता है।यह कोहबर गीत नवविवाहित दंपति को राम–सीता के दिव्य युगल से जोड़ते हुए मंगलकामनाएँ अर्पित करता है। गीत में गायिकाएँ दुल्हन के श्रृंगार—सिंदूर की झलक, चमकती टिकुली, नूपुर और अनमोल गहनों का मनोहारी चित्रण करती हैं। सखियों के सुरीले मंगलगीत के साथ नवदम्पति के एकसाथ कोहबर में प्रवेश का वर्णन है, और गीत का समापन इस पवित्र संयोग की युग-युग वृद्धि और अटूट सौभाग्य की कामना से होता है।



























