
गाने का विवरण
मिथिला में बच्चे के जन्म पर बधइया गीत गाए जाते हैं। ये गीत शुभकामनाओं, उत्साह और हल्की-फुल्की नोकझोंक से भरे होते हैं। परिवार की महिलाएँ—विशेषकर ननद (पति की बहन) और भाभी—आपस में चुटकी लेते हुए हंसी का माहौल रचती हैं। इस अवसर पर उपहार और आशीर्वाद देने की परंपरा भी जुड़ी रहती है। यह मनभावन बधइया गीत ननद और भाभी की चंचल बातचीत को स्वर देता है। गीत की शुरुआत में ननद शिकायत करती है कि जैसे ही वह अपने भाई के घर पहुँची, भाभी ने अपने कंगन छिपा लिए । भाभी अपनी मज़बूरी जताते हुए जवाब देती है कि उसके पास तो कुछ भी नहीं है—हार टूटा हुआ है, थाली फूटी हुई है, साड़ी चिथड़ों में है—और ननद को बस नवजात शिशु की आँखों की चमक से संतोष कर लेना चाहिए। लेकिन ननद हार नहीं मानती और कहती है कि वह कोई बहाना नहीं सुनेगी —सन्दूक खोलिए और कंगन निकाल कर मुझे पहनाइए। हास-परिहास से भरा यह गीत न सिर्फ बच्चे के जन्म का उल्लास प्रकट करता है, बल्कि ननद भाभी के आपसी स्नेह को भी खूबसूरती से दर्शाता है।



















