
गीत के बोल
जपत मन आनन्द शिव-शिव,
जपत मन आनन्द । 2
जाहि सुमिरत विघ्न बिहुँसत,
जाहि सुमिरत विघ्न विघटत ।
कटत जम केर फन्द शिव-शिव,
जपत मन आनन्द ।
हाथ डामरू गले मे बिषधर,
जटा सुशोभित गंग ।
जटा सुशोभित गंग शिव-शिव - 2
जपत मन आनन्द शिव-शिव,
जपत मन आनन्द ।
कार्तिक गणपति गोद लिओ है,
पार्वती के संग ।
पार्वती के संग शिव-शिव,
जपत मन आनन्द शिव-शिव,
जपत मन आनन्द ।
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डॉ. रानी झा

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जपत मन आनन्द
डॉ. रानी झा

जौ हम जनितहुँ
डॉ. रानी झा

साँझ भइ घर दिअरा जरी रे
डॉ. रानी झा

कोने बाबा घर साँझ
डॉ. रानी झा

सखी हे साँझ भयओ
डॉ. रानी झा

कमल नयन परदेश हे भामिनी
डॉ. रानी झा
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