गीत के बोल
जुनि करू राम वियोग हे जननी -2
सुतल छलहुँ सपन एक देखल -२
समुद्र मे उठल हिलोर हे जननी
दुइ पुरुष हम अबइत देखल
एक श्यामल एक गोर हे जननी
कंचन गढ़ हम जरइत देखल
राक्षस करय किलोल हे जननी
जुनि करू राम वियोग हे जननी -2
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डॉ. प्रेमलता मिश्रा

ऊँचा रे झरोखा
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

प्रथम मास आषाढ़
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

हे उद्धो बड़ा रे चतुर
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

धीया बिनु सूना
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

मेही भात जतन भनसिआ
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

जाहि घर आहो बाबा
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

जुनि करू राम वियोग
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

हम ने जियब बिनु राम
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

सखिया सावन में डर लागे
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

पानहि शन धनी पातरी
डॉ. प्रेमलता मिश्रा
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