
गीत के बोल
छोटी-मोटी टुटली मड़ैआ मे गौरी दाइ
छोटी-मोटी टुटली मड़ैआ मे गौरी दाइ, कोना कऽ रहथिन हे -2
गौरी हमर छथि बड़ सहलौला, कोना कऽ पिसथी भाङक गोला -2
हाथो मे...
हाथो मे पड़ि जैतनि लोड़ही के ठेला, रानी कोना कऽ पिसती हे -2
छोटी-मोटी टुटली मड़ैआ मे गौरी दाइ, कोना कऽ रहथिन हे।
भोला के दू धुर आकक बाड़ी, पित्तो नहि कएलनि खेती-पथारी -2
धियापुता...
धियापुता के पेट भऽ गेल बखारी रानी, कोना के भरथिन हे -2
छोटी-मोटी टुटली मड़ैआ मे गौरी दाइ, कोना कऽ रहथिन हे।
अपने महादेव भेला मसानी, के देत बसहा के गूड़ा ओ सानी -2
पड़ि गेल...
पड़ि गेल गौरी के भारी बिपति रानी, कते दुःख कटथिन हे -2
छोटी-मोटी टुटली मड़ैआ मे गौरी दाइ, कोना कऽ रहथिन हे।
भनहि विद्यापति सुनू हे मनाइन -2
त्रिभुवनपति भण्डारी के सङ्ग रानी, हँसी-खुशी रहथिन हे -2
छोटी-मोटी टुटली मड़ैआ मे गौरी दाइ,
कोना कऽ रहथिन हे -3
पूरे बोल देखें
गाने का विवरण
इस गीत को मैथिली साहित्य और कविता में महेशवानी के रूप में वर्गीकृत किया गया है। महेशवानी भगवान शिव की स्तुति में गाया जाता है और मनाइन (मेन्का, गौरी की माता) को संबोधित किया जाता है। यह शिव के जीवन का प्रतिनिधित्व करता है और विशेष रूप से उनकी शादी का।
और गाने
रजनी-पल्लवी

आयल चैत मधुर रंग पाँचम
रजनी-पल्लवी

यौ गजानन गणपति
रजनी-पल्लवी

कानि कानि कहथिन सीता
रजनी-पल्लवी

चलु देखु भरि नयना
रजनी-पल्लवी

अवध नगरिया सँ
रजनी-पल्लवी

गाम के अधिकारी
रजनी-पल्लवी

कातिक मास बीतल सुकराती
रजनी-पल्लवी

प्रिय पाहुन सिन्दूर दान करू
रजनी-पल्लवी

सतरंगी संसार सँ
रजनी-पल्लवी

लिख रहल छी चिट्ठी भइया
रजनी-पल्लवी
ऐसे और गाने






