राम, सीता, लक्ष्मण, वनवास
राम, सीता, लक्ष्मण, वनवास

गीत के बोल

हम नइ जीयब बिनु राम जननी - 3

हम नइ जीयब बिनु राम ।
होइत प्रात बोन जाएब - 2
जहाँ भेटथि सीताराम जननी,
हम नइ जीयब बिनु राम ।
कपटी-कपटी नऽ बसु जइ नग्रमे*,

कपटी-कपटी बसथि नग्रमे*,
अग्नि लगाएब ओहि ठाम जननी,
हम नइ जीयब बिनु राम ।
हम नइ जीयब बिनु राम जननी - 2
हम नइ जीयब बिनु राम ।

माता-पिता एक्को कियो नइ सम्बल,
माता-पिता कियो एक्को नइ सम्बल,
केवल सीताराम जननी ।
हम नइ जीयब बिनु राम ।

सूर-नर-मुनि सब अपजश देलनि,-2
देलनि एकहि काम जननी ।
हम नइ जीयब बिनु राम ।

राम-लखन-सिया बन कऽ सिधारल - 2
नृपति तेजल निधाम जननी,
हम नइ जीयब बिनु राम ।
हम नइ जीयब बिनु राम जननी,
हम नइ जीयब बिनु राम ।

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