गीत के बोल
मोती-मालवला बरुआ के, घुरमल-घुरमल केश - 2
हीरा-मालवला बरुआ के, घुरमल-घुरमल केश ।
हुनकर दादा गढ़ाबए छूरी, या दादी लेथिन केश- 2
मोती-मालवला बरुआ के, घुरमल-घुरमल केश,
सोने-मालवला बरुआ के, घुरमल-घुरमल केश ।
हुनकर केये लेतय लपटी, केये लेतय केश,
आ गे माइ केये लेतय लपटी, केये लेतय केश,
मोती-मालवला बरुआ के, घुरमल-घुरमल केश,
सोने-मालवला बरुआ के, घुरमल-घुरमल केश ।
हुनकर दादी लेतय लपटी, नानी लेतय केश - 2
मोती-मालवला बरुआ के, घुरमल-घुरमल केश,
सोने-मालवला बरुआ के, घुरमल-घुरमल केश ।
हुनकर मौसी लेतय लपटी, मामी लेतय केश - 2
मोती-मालवला बरुआ के, घुरमल-घुरमल केश,
सोने-मालवला बरुआ के, घुरमल-घुरमल केश ।
मोती-मालवला बरुआ के, घुरमल-घुरमल केश ।
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गाने का विवरण
मुंडन जन्म के बाद किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण संस्कार है। इस अवसर पर बरुए (बच्चे) के बाल पहली बार काटे जाते हैं, जिन्हें पारंपरिक रूप से कैंची से ही काटा जाता है और उस्तरा नहीं इस्तेमाल होता है । यह संस्कार प्रायः पहले, तीसरे या पाँचवें वर्ष में संपन्न होता है। यह गीत बच्चे के बाल काटने के समय गाया जा रहा है। मुंडन के समय बाल ज़मीन पर नहीं गिरने दिए जाते। परिवार की कोई मानतुल्य महिला—जैसे मामी या चाची—उन्हें सावधानी से अपने आँचल में समेटती है। शाम को ये बाल किसी शुभ स्थान, जैसे बांस के पेड़ की जड़ में या नदी में, विसर्जित किए जाते हैं। इस गीत में बारी बारी से सभी रिश्तेदारों का नाम लिया जा रहा जो बच्चे के बाल अपने आँचल में समेटेंगी। गीत में थोड़ा मजाक का पुट भी है।
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