
गीत के बोल
सखी हे साँझ भयओ नहि आयो मुरारी,
कहाँ अटकल गिरधारी ।
ढूँढ़त फिरथ मातु जशोदा,
घर-घर करथि पुछारी ।
कारण कोन नाथ नहि आयो,
कंस असुर दल भारी ।
सखी हे साँझ भयओ नहि आयो मुरारी,
कहाँ अटकल गिरधारी ।
झुण्डक झुण्ड ग्वालिन सब आयो,
पढ़त जशोदा जी के गारी ।
मटुकी मेरो फोड़ दियो है,
फाड़ दियो पट-साड़ी ।
सखी हे साँझ भयओ नहि आयो मुरारी,
कहाँ अटकल गिरधारी ।
रोबत-रोबत मोहन आयो,
नयना सँ नीर बहाइ ।
सखी हे बंशी मेरो छिन लियो है,
सब सखियन मिली मारी ।
सखी हे साँझ भयओ नहि आयो मुरारी,
कहाँ अटकल गिरधारी ।
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