
गाने का विवरण
कारिख धर्मराज की पूजा भक्तजन द्वारा उनकी वंदना से आरंभ होती है। लोक-देवता होने के कारण यह पूजा औपचारिक नियमों से अधिक सरल, आत्मीय और भावप्रधान होती है। इस गीत में भगत ढलती उम्र, झरते दाँत और थकान के बावजूद अपनी अटूट श्रद्धा के साथ चारों दिशाओं में कारिख पजियार की खोज करते हुए अन्य लोकदेवताओं का भी स्मरण करता है। अनदु, मीरा सुल्तान, धवलागिरि, गंगा-हनुमान जैसे नामों के माध्यम से वह ईश्वरीय शक्ति की सर्वत्र उपस्थिति का आह्वान करता है। यह गीत एक भक्त की गहरी लोक-आस्था का प्रतीक है—जहाँ देवता किसी दूरस्थ राजपुरुष नहीं, बल्कि घर-आँगन के रक्षक, अपनेपन और करुणा से भरे ‘बालक पजियार’ हैं, जिनकी स्मृति ही भक्ति का सबसे बड़ा संबल है।














