
गाने का विवरण
ज्योति पजियार की गाथा मिथिला की एक अत्यंत प्रिय लोककथा है, जिसमें ग्रामीण जीवन, प्रकृति और परम्पराओं की सजीव झलक मिलती है। ज्योति मूलतः दुसाध समुदाय के वीर नायक थे, लेकिन उनकी पूजा यादव, ब्राह्मण, सुड़ी, तेली, मल्लाह—सभी जातियों द्वारा समान श्रद्धा से की जाती है। इसी कारण यह गाथा सामाजिक एकता और भाईचारे का सुन्दर प्रतीक मानी जाती है। कथा में लिकमावती की विपत्ति, ज्योति का अवतरण, दीनानाथ का शाप और मोह-मिलन जैसी घटनाएँ आती हैं, जो इसे अत्यंत रोचक बनाती हैं। जब भगत झाल, मृदंग और ‘हो-हो’ की टेक के साथ इस गाथा को गाते हैं, तो पूरा गाँव आध्यात्मिक ऊर्जा और उत्साह से भर उठता है। इस गाथा से यह संदेश मिलता है कि जब भी कोई अन्यायी या अत्याचारी सज्जन एवं साधु को कष्ट देता है, तो ज्योति जैसे दिव्य नायक समाज की रक्षा के लिए अवतरित होते हैं। इस गीत में ज्योति महागाथा की इसी अद्भुत परम्परा की एक झलक प्रस्तुत है।










