भगैत मंडली
हमारे बारे में
लाली साह (58 वर्ष) और खट्टर साह (57 वर्ष), बिहार के सुपौल ज़िले के चिकनापट्टी गाँव के लोकगायक, अपने गाँव की भगैत मंडली के प्रमुख सदस्य हैं। भगैत, जिसे भगत भी कहा जाता है, मिथिला की सदियों पुरानी धार्मिक लोकगायन परंपरा है, जो संगीत, नाट्य और अनुष्ठान को एक सूत्र में बाँधती है।
भगैत एक आस्था-आधारित प्रस्तुति है जिसमें देवपुरुषों को पुकारा जाता है और लोकगाथाएँ जीवंत की जाती हैं। इसके कथानक धर्मराज, ज्योति, करु महाराज, बेनी, बिसाहैर, हरिया डोम और मीरा साहब जैसे वीर–पौराणिक पात्रों का गुणगान करते हैं। ऊँचे स्वर के गायन, जीवंत संवाद और भक्ति-भाव से ओतप्रोत अवस्थाओं में भगत को देवता का अवतार माना जाता है। यह परंपरा जाति और धर्म की सीमाओं से ऊपर उठकर समाज को जोड़ती है। यद्यपि आधुनिकता के दबाव से इसका अस्तित्व संकट में है, फिर भी भगैत मिथिला की आध्यात्मिक और नाट्य–परंपरा का अनमोल जीवंत स्वरूप है।







