
गाने का विवरण
भगैत परंपरा में भक्त हरिया की अटूट भक्ति का उदाहरण मिलता है। उनकी सबसे बड़ी परीक्षा तब हुई जब धर्मराज बाबा ने उनसे अपने ही पुत्र का बलिदान माँगा। पिता का स्नेह और ईश्वर की भक्ति के बीच हरिया डगमगाए नहीं। उन्होंने निष्ठा से बलिदान देने का निश्चय किया। तभी धर्मराज ने अपना वास्तविक स्वरूप प्रकट किया, बालक को पुनः जीवन दिया और हरिया को आशीर्वाद दिया। यह कथा आज भी गाई जाती है कि सच्ची भक्ति में सबसे कठिन परीक्षा भी ईश्वर की कृपा से पार हो जाती है।










