डॉ. महेन्द्र नारायण राम
हमारे बारे में
डॉ. महेन्द्र नारायण राम बिहार के एक सम्मानित लोकसाहित्यकार, लेखक और सांस्कृतिक इतिहासकार हैं, जो मिथिला क्षेत्र की मौखिक परंपराओं, लोक साहित्य और जीवन्त इतिहास के गहरे अध्ययन के लिए व्यापक रूप से जाने जाते हैं। फील्डवर्क और साहित्यिक विश्लेषण दोनों में गहरी जानकारी रखने वाले डॉ. राम ने दर्जनों पुस्तकों की रचना की है और कई संकलनों का संपादन एवं उनमें योगदान भी किया है। उनकी प्रमुख कृतियों में कारिख लोकगाथा, सलहेश लोकगाथा, भाओ भगैत गहबर गीत, दिनाभद्री लोकगाथा, दुसाध जाति का विस्तृत इतिहास, मैथिली लोकवृत्त: बिंदु और विस्तार , लोक काव्य कुसुम, दामिनी, मैथिली लोक-साहित्यक इतिहास, मनतोडिया,लोकाञ्जन, दलित दर्शन, मिथिलाक संघर्ष दूत: डा.बैद्यनाथ चौधरी'बैजू', जेना जनलियनि, लोक संदर्भ, लोक दर्शन, भारतीय संस्कृति मे जातीय जीवन आदि शामिल हैं।
उनकी कहानियाँ, कविताएँ और निबंध नियमित रूप से विभिन्न पत्रिकाओं और शैक्षणिक शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रहती हैं। वे मैथिली अकादमी के अध्यक्ष रह चुके हैं, साहित्य अकादमी के सदस्य रहे हैं, और कई सरकारी व गैर-सरकारी संस्थानों में प्रतिष्ठित पदों पर कार्य कर चुके हैं।
डॉ. राम को मिथिला विभूति, मैथिलश्री, मिथिला शिरोमणि, और मिथिला रत्न जैसे कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाज़ा गया है। वे भारत में लोक ज्ञान और दलित साहित्यिक परंपराओं के संरक्षण के क्षेत्र में एक अग्रणी स्वर बने हुए हैं।










