गोदना कला, मिथिला
गोदना कला, मिथिला

गीत के बोल

सैन्धु बोन पहाड़ मे बसैये ऽऽ
अन्हेरबाट गुअरबा नै रौ ऽऽ
ओहे चरबै सेना लाख गाय ऽऽ।
हकन-बिकन कनै छै नारायण हो ऽऽ
कारिख नंद लाल ऽऽ ने हौ
बोली बोलइ छै कोइलीयाऽ लगऽ आऽबऽऽ
केना हम जेबै कोइलीया ऽ
सेन्धुबोन पहाड़ मे नै गय ऽ
ओतिहि बसै छै बाघ त बधिनिया ऽऽ
हकन-बिकन कनै छै दुलरबा ऽ
केदलि के बोन मे नै हौ
बोली बोलइ कोइलीया लग आ ऽऽ ब ऽऽ।
जइयौ-जइयौ-जाईयौ कोइलिया
परोली नगरिया ने गय
कुशल कहियौ अपरा सती आ ऽ ब ऽऽ ।
दुअरे पर हेतै कोइलीया
चानन बीरीठिया ने हाय
मैया रोबैत हेतै सोइरीयै घर में आऽऽब ऽऽI
सोना से मढ्यबै कोइलिया
चोंच त मेदैबै दही चूड़ा भोजन तोरा आ ऽऽ बऽऽ।
जाति के ओठै हे तिरिया
तहुँ जब लागै छै नै हे
कोना ऐहन वचन हे ऽऽ।
बटिया जे जोहत हेतै
सती मैया अपरा ने है
जल्दी जेबै परौली स्थान हे ऽऽ।
हाक जब मारे है दुलरवा
भैरव नंद लाल के हे
बोली बोलइ छै कारिख नंद लाल ऽऽ ।
कहाँ गेल किया रौ भेल
भैरव दुलरबा नै रौ
जल्दी से डोलिया दीऔ फनाँय
जल्दी से डोलिया बेइमनमाँ
तहुँ त फनबियौ
हम जेबै परौली स्थान हे ऽऽ।
एकटा जे बेटा बेइमनमाँ
मैया कोंखि भेलै नै हौ
बटिआ जोहै हेतै अपरा सती आ ऽ ब ऽऽI
डोलिया बनाबै छै नारायण
भैरव नंदलाऽ लऽ
हकन कनै छै अमरितावती आ ऽऽ ब ऽऽ।
हकन बिकन कनै छै नारायण
सती त अमरिता यौ
बोली बोलइ छै अमरितावती आ ऽऽ ब ऽऽ ।
इनती जे करै हो मैया
अगिला कहरिया नै हौ
दसो कल जोड़ि के परनाम हे ऽऽ।
तनिको आइ डोलीया मैया
तहुँ विलमबियौ आ ऽऽ ब ऽऽ।

पूरे बोल देखें

गीत के बोल

सैन्धु बोन पहाड़ मे बसैये ऽऽ
अन्हेरबाट गुअरबा नै रौ ऽऽ
ओहे चरबै सेना लाख गाय ऽऽ।
हकन-बिकन कनै छै नारायण हो ऽऽ
कारिख नंद लाल ऽऽ ने हौ
बोली बोलइ छै कोइलीयाऽ लगऽ आऽबऽऽ
केना हम जेबै कोइलीया ऽ
सेन्धुबोन पहाड़ मे नै गय ऽ
ओतिहि बसै छै बाघ त बधिनिया ऽऽ
हकन-बिकन कनै छै दुलरबा ऽ
केदलि के बोन मे नै हौ
बोली बोलइ कोइलीया लग आ ऽऽ ब ऽऽ।
जइयौ-जइयौ-जाईयौ कोइलिया
परोली नगरिया ने गय
कुशल कहियौ अपरा सती आ ऽ ब ऽऽ ।
दुअरे पर हेतै कोइलीया
चानन बीरीठिया ने हाय
मैया रोबैत हेतै सोइरीयै घर में आऽऽब ऽऽI
सोना से मढ्यबै कोइलिया
चोंच त मेदैबै दही चूड़ा भोजन तोरा आ ऽऽ बऽऽ।
जाति के ओठै हे तिरिया
तहुँ जब लागै छै नै हे
कोना ऐहन वचन हे ऽऽ।
बटिया जे जोहत हेतै
सती मैया अपरा ने है
जल्दी जेबै परौली स्थान हे ऽऽ।
हाक जब मारे है दुलरवा
भैरव नंद लाल के हे
बोली बोलइ छै कारिख नंद लाल ऽऽ ।
कहाँ गेल किया रौ भेल
भैरव दुलरबा नै रौ
जल्दी से डोलिया दीऔ फनाँय
जल्दी से डोलिया बेइमनमाँ
तहुँ त फनबियौ
हम जेबै परौली स्थान हे ऽऽ।
एकटा जे बेटा बेइमनमाँ
मैया कोंखि भेलै नै हौ
बटिआ जोहै हेतै अपरा सती आ ऽ ब ऽऽI
डोलिया बनाबै छै नारायण
भैरव नंदलाऽ लऽ
हकन कनै छै अमरितावती आ ऽऽ ब ऽऽ।
हकन बिकन कनै छै नारायण
सती त अमरिता यौ
बोली बोलइ छै अमरितावती आ ऽऽ ब ऽऽ ।
इनती जे करै हो मैया
अगिला कहरिया नै हौ
दसो कल जोड़ि के परनाम हे ऽऽ।
तनिको आइ डोलीया मैया
तहुँ विलमबियौ आ ऽऽ ब ऽऽ।

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गीत के बोल

सैन्धु बोन पहाड़ मे बसैये ऽऽ
अन्हेरबाट गुअरबा नै रौ ऽऽ
ओहे चरबै सेना लाख गाय ऽऽ।
हकन-बिकन कनै छै नारायण हो ऽऽ
कारिख नंद लाल ऽऽ ने हौ
बोली बोलइ छै कोइलीयाऽ लगऽ आऽबऽऽ
केना हम जेबै कोइलीया ऽ
सेन्धुबोन पहाड़ मे नै गय ऽ
ओतिहि बसै छै बाघ त बधिनिया ऽऽ
हकन-बिकन कनै छै दुलरबा ऽ
केदलि के बोन मे नै हौ
बोली बोलइ कोइलीया लग आ ऽऽ ब ऽऽ।
जइयौ-जइयौ-जाईयौ कोइलिया
परोली नगरिया ने गय
कुशल कहियौ अपरा सती आ ऽ ब ऽऽ ।
दुअरे पर हेतै कोइलीया
चानन बीरीठिया ने हाय
मैया रोबैत हेतै सोइरीयै घर में आऽऽब ऽऽI
सोना से मढ्यबै कोइलिया
चोंच त मेदैबै दही चूड़ा भोजन तोरा आ ऽऽ बऽऽ।
जाति के ओठै हे तिरिया
तहुँ जब लागै छै नै हे
कोना ऐहन वचन हे ऽऽ।
बटिया जे जोहत हेतै
सती मैया अपरा ने है
जल्दी जेबै परौली स्थान हे ऽऽ।
हाक जब मारे है दुलरवा
भैरव नंद लाल के हे
बोली बोलइ छै कारिख नंद लाल ऽऽ ।
कहाँ गेल किया रौ भेल
भैरव दुलरबा नै रौ
जल्दी से डोलिया दीऔ फनाँय
जल्दी से डोलिया बेइमनमाँ
तहुँ त फनबियौ
हम जेबै परौली स्थान हे ऽऽ।
एकटा जे बेटा बेइमनमाँ
मैया कोंखि भेलै नै हौ
बटिआ जोहै हेतै अपरा सती आ ऽ ब ऽऽI
डोलिया बनाबै छै नारायण
भैरव नंदलाऽ लऽ
हकन कनै छै अमरितावती आ ऽऽ ब ऽऽ।
हकन बिकन कनै छै नारायण
सती त अमरिता यौ
बोली बोलइ छै अमरितावती आ ऽऽ ब ऽऽ ।
इनती जे करै हो मैया
अगिला कहरिया नै हौ
दसो कल जोड़ि के परनाम हे ऽऽ।
तनिको आइ डोलीया मैया
तहुँ विलमबियौ आ ऽऽ ब ऽऽ।

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गाने का विवरण

लोकदेवताओं में कारिख पजियार का स्थान अत्यंत विशिष्ट है। ऐसा माना जाता है कि कारिख सूर्य की कृपा से अवतरित हुए हैं। इस गीत में उस समय का वर्णन है जब कारिख अपने पिता का श्राप दूर करने हेतु केदलीवन की ओर प्रस्थान करते हैं। यह मार्ग गहन अंधकार, अनिष्ट संकेतों, वन्य पशुओं और अनेक बाधाओं से भरा हुआ है। इस गीत में घर पर लोगों की व्याकुलता और कार्य की गहन कठिनता से उत्पन्न चिंता का चित्रण है—जैसे कि अमरितावती व्याकुल प्रतीक्षा में हैं; कारिख की कुशल-क्षेम जानने को वे कोयल को दूत बनाकर बार-बार पुकारती, रोकती, मनाती हैं। यही भाव इस गीत का मूल है—एक लोकनायक की यात्राओं के साथ जुड़ी चिंता और व्याकुलता।

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