हाथी पर राजा साल्हेश अपने सेना के साथ घोड़ों पर
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पराक्रम गाथाएँ पारंपरिक लोकगीत हैं, जो दीनाभद्री, लोरिक–मनिआर, राजा सल्हेस और अल्हा जैसे लोकनायकों के साहस और वीरता का वर्णन करती हैं। ये वीर केवल शारीरिक बल ही नहीं, बल्कि करुणा और न्याय की भावना के प्रतीक भी हैं—वे दुर्बलों की रक्षा करते हैं और धर्म की स्थापना करते हैं। वीरता के साथ-साथ इन गीतों में प्रेम, सौंदर्य और कोमल मानवीय भावनाओं की झलक भी मिलती है। ये गाथाएँ पराक्रम और संवेदना, शक्ति और प्रेम—दोनों का संगम हैं, और भारत की समृद्ध लोकपरंपरा का अमिट हिस्सा हैं।

पराक्रम गाथाएँ पारंपरिक लोकगीत हैं, जो दीनाभद्री, लोरिक–मनिआर, राजा सल्हेस और अल्हा जैसे लोकनायकों के साहस और वीरता का वर्णन करती हैं। ये वीर केवल शारीरिक बल ही नहीं, बल्कि करुणा और न्याय की भावना के प्रतीक भी हैं—वे दुर्बलों की रक्षा करते हैं और धर्म की स्थापना करते हैं। वीरता के साथ-साथ इन गीतों में प्रेम, सौंदर्य और कोमल मानवीय भावनाओं की झलक भी मिलती है। ये गाथाएँ पराक्रम और संवेदना, शक्ति और प्रेम—दोनों का संगम हैं, और भारत की समृद्ध लोकपरंपरा का अमिट हिस्सा हैं।

गीतों में

शौर्य गाथा

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