
गीत के बोल
कानि कानि कहथिन सीता
सुनू हनुमान यो
कोना कऽ बिसरि गेला-2
मोर भगवान यो
हरि बिनु सून भेल-2
सकल जहान यो
जल-थल सब लागय
अग्नि समान यो
कोना कऽ बिसरि गेला
तइयो नहि अधम तन सऽ
निकलैए प्राण यो
कहथिन सीता दाइ
सुनू हनुमान यो
कोना कऽ बिसरि गेला
मोर भगवान यो
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गाने का विवरण
यह गीत रामायण के सुन्दरकाण्ड पर आधारित एक मैथिली भजन है — जब सीता लंका की अशोक वाटिका में बंदी हैं और श्रीराम की प्रतीक्षा में व्याकुल हैं। रो-रोकर सीता हनुमान जी से कहती हैं—“हे हनुमान, सुनो! मेरे भगवान मुझे कैसे भूल गए?” राम के बिना यह पूरा संसार मुझे सूना लगता है। जल और थल—सब कुछ मुझे अग्नि समान तपता हुआ प्रतीत होता है। फिर भी, इतने असह्य कष्ट के बाद भी इस अभागे शरीर से प्राण नहीं निकलते। राम के बिना जीवित रहना ही मेरी सबसे बड़ी यातना बन गयी है।
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