
गीत के बोल
कातिक मास बीतल सुकराती,
करब छठिक ओरिआन ।
माइ हे! हमर मनोरथ अहीं जनइ छी,
करबइ दुखक निदान ।
छठि मइया! हमर मनोरथ अहीं जनइ छी।
करबइ दुखक निदान ।
सभहक दुख हरइ छी हे मइया!
महिमा अहाँक अपार ।
हमहुँ कर जोड़ि करइ छी,
अहीं छी जगत आधार ।
माइ हे! निर्धन दीन दुखी अवला छी,
छी हम निःसन्तान ।
छठि मइया! हमर मनोरथ अहीं जनइ छी।
करबइ दुखक निदान ।
अरघ लेल हम घाट सजैबइ,
अरिपन सिनूर पिठार ।
ठकुआ भुसबा पूरी पिड़िकिया, कुसिआ आ कुरबार ।
माइ हे! आरती के ओरिआन केने छी, धूप-दीप पकबान ।
छठि मइया! हमर मनोरथ अहीं जनइ छी।
करबइ दुखक निदान ।
एहि संसारक शक्ति सूर्य छथि,
दूर करथि अन्हार ।
इनकर बहिन दयालु मइया,
जग के तारणहार ।
माइ हे! तीनू लोकक कष्ट हरइ छी, जग मे अहींक गुणगान ।
छठि मइया! हमर मनोरथ अहीं जनइ छी।
करबइ दुखक निदान ।
हे छठि मइया! हमर मनोरथ अहीं जनइ छी।
करबइ दुखक निदान ।
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