


छठ पूजा में गाए जाने वाले ये गीत स्त्री की सामाजिक स्थिति, उसकी पीड़ा, आकांक्षाएँ और परिवार की कुशलता की कामना को व्यक्त करते हैं। यह चार दिवसीय पर्व भाई दूज के तीसरे दिन से प्रारंभ होकर कार्तिक शुक्ल षष्ठी को सम्पन्न होता है।
पहले दिन 'नहाय-खाय' में शुद्धि और सात्त्विक भोजन होता है। दूसरे दिन 'खरना' में दिनभर का उपवास खीर से खोला जाता है, फिर 36 घंटे का निर्जला व्रत आरंभ होता है। तीसरे दिन महिलाएँ नदी किनारे अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देती हैं, और अगली सुबह उदयमान सूर्य को। दीपमालाओं के बीच गाए जाने वाले छठ गीतों में भगवान सूर्य, उषा व प्रत्युषा से सुख-समृद्धि की प्रार्थना की जाती है।
छठ पूजा में गाए जाने वाले ये गीत स्त्री की सामाजिक स्थिति, उसकी पीड़ा, आकांक्षाएँ और परिवार की कुशलता की कामना को व्यक्त करते हैं। यह चार दिवसीय पर्व भाई दूज के तीसरे दिन से प्रारंभ होकर कार्तिक शुक्ल षष्ठी को सम्पन्न होता है।
पहले दिन 'नहाय-खाय' में शुद्धि और सात्त्विक भोजन होता है। दूसरे दिन 'खरना' में दिनभर का उपवास खीर से खोला जाता है, फिर 36 घंटे का निर्जला व्रत आरंभ होता है। तीसरे दिन महिलाएँ नदी किनारे अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देती हैं, और अगली सुबह उदयमान सूर्य को। दीपमालाओं के बीच गाए जाने वाले छठ गीतों में भगवान सूर्य, उषा व प्रत्युषा से सुख-समृद्धि की प्रार्थना की जाती है।
गीतों में
छठ
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