





गीत के बोल
हम झेलम नहाएब हम शतलज नहाएब - 2
गंगा मैया नहाएब तीरबेणीयो नहाएब ।
मुदा मिथिले, हे मुदा मिथिले के जल सँ भरब गगरी,
हम छी सीता हमर ई जनक नगरी - 2
किरण उगलो नै रहतइ तऽ कातिक नहाएब,
मास माघो नहाएब, बइसाखो नहाएब ।
आकाशे हम अपन नूआ सुखाएब - 2
हे हम ओकर लाज, हे हम ओकर लाज आओ हमर चुनरी,
मुदा मिथिले के जल सँ भरब गगरी,
हम मिथिले के जल सँ भरब गगरी ।
हम छी सीता, हे हम छी सीता हमर ई जनक नगरी,
हम मिथिले के जल सँ भरब गगरी – 2
अपन ज्ञानो बढ़ाएब विज्ञानो बढ़ाएब,
अपन मिथिला के नब-नब रङ्ग मे रङ्गाएब ।
अपन ज्ञानो बढ़ाएब विज्ञानो बढ़ाएब,
अपन मिथिला के नब-नब रङ्ग मे रङ्गाएब ।
ओ गगन के, हे ओ गगन के घटा हम ओकर बिजुरी,
हम मिथिले के जल सँ भरब गगरी - 2
हम महिला समाज जुग नबका बनाएब - 2
फूल तोड़ब मुदा काँट सँ नइ डेराएब - 2
एकर धूरे, हे एकर धूरे पराग हम भरब अँजुरी,
मुदा मिथिले के जल सँ भरब गगरी - 2
हम छी सीता, हे हम छी सीता हमर ई जनक नगरी,
हम मिथिले के जल सँ भरब गगरी - 3
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गीत के बोल
हम झेलम नहाएब हम शतलज नहाएब - 2
गंगा मैया नहाएब तीरबेणीयो नहाएब ।
मुदा मिथिले, हे मुदा मिथिले के जल सँ भरब गगरी,
हम छी सीता हमर ई जनक नगरी - 2
किरण उगलो नै रहतइ तऽ कातिक नहाएब,
मास माघो नहाएब, बइसाखो नहाएब ।
आकाशे हम अपन नूआ सुखाएब - 2
हे हम ओकर लाज, हे हम ओकर लाज आओ हमर चुनरी,
मुदा मिथिले के जल सँ भरब गगरी,
हम मिथिले के जल सँ भरब गगरी ।
हम छी सीता, हे हम छी सीता हमर ई जनक नगरी,
हम मिथिले के जल सँ भरब गगरी – 2
अपन ज्ञानो बढ़ाएब विज्ञानो बढ़ाएब,
अपन मिथिला के नब-नब रङ्ग मे रङ्गाएब ।
अपन ज्ञानो बढ़ाएब विज्ञानो बढ़ाएब,
अपन मिथिला के नब-नब रङ्ग मे रङ्गाएब ।
ओ गगन के, हे ओ गगन के घटा हम ओकर बिजुरी,
हम मिथिले के जल सँ भरब गगरी - 2
हम महिला समाज जुग नबका बनाएब - 2
फूल तोड़ब मुदा काँट सँ नइ डेराएब - 2
एकर धूरे, हे एकर धूरे पराग हम भरब अँजुरी,
मुदा मिथिले के जल सँ भरब गगरी - 2
हम छी सीता, हे हम छी सीता हमर ई जनक नगरी,
हम मिथिले के जल सँ भरब गगरी - 3
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गीत के बोल
हम झेलम नहाएब हम शतलज नहाएब - 2
गंगा मैया नहाएब तीरबेणीयो नहाएब ।
मुदा मिथिले, हे मुदा मिथिले के जल सँ भरब गगरी,
हम छी सीता हमर ई जनक नगरी - 2
किरण उगलो नै रहतइ तऽ कातिक नहाएब,
मास माघो नहाएब, बइसाखो नहाएब ।
आकाशे हम अपन नूआ सुखाएब - 2
हे हम ओकर लाज, हे हम ओकर लाज आओ हमर चुनरी,
मुदा मिथिले के जल सँ भरब गगरी,
हम मिथिले के जल सँ भरब गगरी ।
हम छी सीता, हे हम छी सीता हमर ई जनक नगरी,
हम मिथिले के जल सँ भरब गगरी – 2
अपन ज्ञानो बढ़ाएब विज्ञानो बढ़ाएब,
अपन मिथिला के नब-नब रङ्ग मे रङ्गाएब ।
अपन ज्ञानो बढ़ाएब विज्ञानो बढ़ाएब,
अपन मिथिला के नब-नब रङ्ग मे रङ्गाएब ।
ओ गगन के, हे ओ गगन के घटा हम ओकर बिजुरी,
हम मिथिले के जल सँ भरब गगरी - 2
हम महिला समाज जुग नबका बनाएब - 2
फूल तोड़ब मुदा काँट सँ नइ डेराएब - 2
एकर धूरे, हे एकर धूरे पराग हम भरब अँजुरी,
मुदा मिथिले के जल सँ भरब गगरी - 2
हम छी सीता, हे हम छी सीता हमर ई जनक नगरी,
हम मिथिले के जल सँ भरब गगरी - 3
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विभा झा

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यौ नारद कतए बुझा हम कहलौं
विभा झा

यौ नारद कतए बुझा हम कहलौं
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यौ नारद कतए बुझा हम कहलौं
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हम छी सीता
विभा झा

हम छी सीता
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एहि बाटे भोला गेला
विभा झा

एहि बाटे भोला गेला
विभा झा

एहि बाटे भोला गेला
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जखने बधइया माँगऽ
विभा झा

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सुतल छलीयै बाबा के भवनबा मे
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हम नइ जीयब बिनु राम
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गौरी पुजू जानकी जनक भवन मे
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