
गीत के बोल
बड़-बड़ लीला महिसौथा मे कयलक
राजा सलहेस के बियाह रचओलक
सात दिन-सात राति जोंक बनओलक
जोंक बनाऽ कऽ कमला मे रखलक
मचल कोलाहल विराटपुर मे
बरिया मोतीराम ओ बुधेसर
झोटा पकड़ि मलिनियाँ घिसिओलक
मारिक डर सँ भूत परायल
सदेह निकलि सलहेस के अनलक
राजा विराटक मड़बा सजौलक
सती माँजरि के शादी रचौलक
दीना नाथ के हाथ उठौलिये
शिलानाथ के पूजा केलिये
कोशी कमला सेहो नहेलिये
मानिकदह परिकरमा केलिये
राजाफुलवाड़ी सेहो घुमलिये
तइयो ने बेमनवा हमरा दर्शन देलकै यो ।
गय चनन काटिकऽ पौआ बनौलियै
सड़ड़ काटि पासि देलीयै
काँचे धागा सँ पलंगिया घोरौलियै
फूले ओछौना फूले बिछौना
फूले के सिरहौना देलियै
चनन काटिके पौआ बनौलियै
गुआ चानन आंगन बड़ छिटलौ
मेदनीफूल हम गांजा लटोलियै
सोना चिलम रूपा ठेकरिया
आँचर फाड़ि हम पलीता बनौलियै
मँह-मँह, मँह- मँह, मँह- मँह करै
पलंगिया सोना थाड़ सिरमा मे हम देलियै
रूपा थाड़ गोरथारीमे देलियै
पान खाइत पनबट्टा जोगौलियै
बंगला पान स्वामी ले देलीयै
तइयो ने निर्देइया दरसन देलकै
जादू मारि हम सुग्गा बनेबै
लऽ पिंजरा हम मोरंग मे जेबै
आब युग-युग हम राज गै बहिना
मोरंग मे भोगबै गै
युग-युग राज हम बहिना।
मोरंगमे भोगबै गै।
खोपा छतौना मोरंगीया बान्हलियै
झरि पोंछ कोचा-कोचा मे झारली
मखमल चोलीया गातऽ लगौलियै
जेना-जेना मन हेतै
तेना-तेना करबै
से बड़-बड़ भगति मोरंगमे केलियै
शनि-रवि पावनि बरत टेकलियै
एकादशी हरिबासो केलियै
नित जल तुलसी मे ढ़ारलियै
शनि-रवि अठवारे केलियै
आठो महिना गंगा नहेलियै
गंगामे एकटंगा देलियै
पुरुब राज पूरनियाँ गेलियै
जड़ि माटि कोशिका मे देलियै
कोशिका मायकें साखी रखलियै
हाथी चढ़ि कऽ गौड़ पूजलियै
दीनां नाथ के सुमरन केलियै
स्वामी औतै पलंग पर बैसितै
ओ सभ सारि स्वामी संग खेलबै
आब मनके ममोलबा गै बहिना
आ मोरंगेमे बीता लेबै गै।
गै रामजोड़ी बहिना
तइयो ने बेइमनमा दुसधवा गै
दर्शनमा देलकै
तइयो ने बेइमनमा
दर्शन तऽ देलकै गै
बेइमनमा छने रहै छै बेलकागढ़ मे
छने रहै छै सखुआ बन मे
छने रहै छै मानिक दहमे
छने रहै छै दहबी घाट मे
कतै दर्शन नइ दै छै। बेमनमा ।
पूरे बोल देखें
गाने का विवरण
साल्हेश को अवतारी पुरुष के रूप में आदर किया जाता है और उन्हें मिथिला और नेपाल के प्रमुख स्थानीय देवताओं में से एक माना जाता है, जहां उन्हें प्यार से राजाजी कहा जाता है। हालांकि वह दुसाध समुदाय में पैदा हुए और उनकी कूल-देवता के रूप में पूजा की जाती है, लेकिन साल्हेश जातीय सीमाओं को पार करते हैं और राम और कृष्ण की तरह एक सार्वभौमिक लोक देवता के रूप में सम्मानित किए जाते हैं। उनके असाधारण मानव गुणों के लिए जाने जाते हैं, उन्होंने अन्याय, उत्पीड़न और शोषण के खिलाफ जंग लड़ी और लोगों की भलाई के लिए पूरी निष्ठा से कार्य किया। उनकी पूजा गांव की संस्कृति में गहराई से समाई हुई है, जिसे ग्रामीण समुदायों ने सदियों से भारत की लोक परंपराओं को सुरक्षित रखा है। मिथिला और नेपाल के लगभग हर दुसाध बस्ती में एक मंदिर होता है जिसे गहवर या साल्हेश थान के रूप में जाना जाता है। ये मंदिर— अक्सर साधारण मिट्टी या फूस की संरचनाएं होती हैं जो पवित्र पेड़ों के नीचे होती हैं — इनमें साल्हेश की मिट्टी की मूर्तियाँ होती हैं जो भौरानंद हाथी पर बैठे होते हैं, उनके साथी मोतीराम, बुधेश्वर, महावत मंगल, मालिन और योद्धा केवला किरात के साथ होती हैं। यह गीत साल्हेश शादी चक्र से संबंधित है— जहां कहा जाता है कि मालिन राजा की ओर आकर्षित हुई और उससे शादी करने की इच्छा व्यक्त करती है, और गीत में उसके मनोभाव और आकांक्षाओं का वर्णन किया गया है।
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