गोदना कला, मिथिला
गोदना कला, मिथिला

गीत के बोल

आऽऽऽ आऽऽ
कओने फूल रोपले लेलही कओने फूल बगीचबा गै
लेलही कओने फूल तोड़ उम्हरल डाढ़ि ऽऽ।

आब एली फूल रोपल जाल गै
तब चमेली फूल रोपल ऽ
आब अड़हुल फूल छिटकैय डाढ़ि ऽऽ।
भैया जाल गिरी हौ ओहि ओरहुल फूल बठैल मनमारि
तइयो लेलही आब अड़हुल फूल बठैय मनमारि आब एली फूल ओरहन लेलही बेली फूल पहिरनऽऽ
आब अड़हुल फूल पेन्हलऽ गला गिरमल हार।
पेन्हीये जे गे लेलही भेलय समतुल
लेलही दैया भेलय समतुल ।
लेलही दैया गै भेलय समतुल ।
सात पानी जल लेलय हाथ वा सम्हारि लेलही चलि भेलै गै
लेलही डैनियाँ दैया के दुआरि लेलही गै।
डैनियाँ दैया बठेला है पोना तऽ जे कोनटा
दैया गोसाओन घर मे लेलही
मनबैय बघेसरि दाइ के।
आब डोका लेलऽ लहरनी दैया साबर पढ़े है गै मारके मंतर पढ़ेय डैनियाँ छौड़ी गै
दैया इहो छौड़ी बंगालिन लेलही गै
आब बठैल ऽ दहिना भाग मे लेलही
बामा भाग में बघेसरि दैया लूकेसरी चललै गै आब डोका तऽ लहरनी लऽ के मंतर पढ़ेलयऽ गै
दैया मंतर पढ़ले गै।
आब मारि के महर आब माटि बरतनमा दैया खून चुबोलय गै।
आब केकर मारलय बेटा के आब
ककर पोता के दैया नाती के मारलय गै
आब सेहो काँनेय अंगनमा बथानमा
लेलही हँसैय दैया बघेसरि हँसैय गै
मैया आब चललै दैया लूकेसरी दैया गै।


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गीत के बोल

आऽऽऽ आऽऽ
कओने फूल रोपले लेलही कओने फूल बगीचबा गै
लेलही कओने फूल तोड़ उम्हरल डाढ़ि ऽऽ।

आब एली फूल रोपल जाल गै
तब चमेली फूल रोपल ऽ
आब अड़हुल फूल छिटकैय डाढ़ि ऽऽ।
भैया जाल गिरी हौ ओहि ओरहुल फूल बठैल मनमारि
तइयो लेलही आब अड़हुल फूल बठैय मनमारि आब एली फूल ओरहन लेलही बेली फूल पहिरनऽऽ
आब अड़हुल फूल पेन्हलऽ गला गिरमल हार।
पेन्हीये जे गे लेलही भेलय समतुल
लेलही दैया भेलय समतुल ।
लेलही दैया गै भेलय समतुल ।
सात पानी जल लेलय हाथ वा सम्हारि लेलही चलि भेलै गै
लेलही डैनियाँ दैया के दुआरि लेलही गै।
डैनियाँ दैया बठेला है पोना तऽ जे कोनटा
दैया गोसाओन घर मे लेलही
मनबैय बघेसरि दाइ के।
आब डोका लेलऽ लहरनी दैया साबर पढ़े है गै मारके मंतर पढ़ेय डैनियाँ छौड़ी गै
दैया इहो छौड़ी बंगालिन लेलही गै
आब बठैल ऽ दहिना भाग मे लेलही
बामा भाग में बघेसरि दैया लूकेसरी चललै गै आब डोका तऽ लहरनी लऽ के मंतर पढ़ेलयऽ गै
दैया मंतर पढ़ले गै।
आब मारि के महर आब माटि बरतनमा दैया खून चुबोलय गै।
आब केकर मारलय बेटा के आब
ककर पोता के दैया नाती के मारलय गै
आब सेहो काँनेय अंगनमा बथानमा
लेलही हँसैय दैया बघेसरि हँसैय गै
मैया आब चललै दैया लूकेसरी दैया गै।


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गीत के बोल

आऽऽऽ आऽऽ
कओने फूल रोपले लेलही कओने फूल बगीचबा गै
लेलही कओने फूल तोड़ उम्हरल डाढ़ि ऽऽ।

आब एली फूल रोपल जाल गै
तब चमेली फूल रोपल ऽ
आब अड़हुल फूल छिटकैय डाढ़ि ऽऽ।
भैया जाल गिरी हौ ओहि ओरहुल फूल बठैल मनमारि
तइयो लेलही आब अड़हुल फूल बठैय मनमारि आब एली फूल ओरहन लेलही बेली फूल पहिरनऽऽ
आब अड़हुल फूल पेन्हलऽ गला गिरमल हार।
पेन्हीये जे गे लेलही भेलय समतुल
लेलही दैया भेलय समतुल ।
लेलही दैया गै भेलय समतुल ।
सात पानी जल लेलय हाथ वा सम्हारि लेलही चलि भेलै गै
लेलही डैनियाँ दैया के दुआरि लेलही गै।
डैनियाँ दैया बठेला है पोना तऽ जे कोनटा
दैया गोसाओन घर मे लेलही
मनबैय बघेसरि दाइ के।
आब डोका लेलऽ लहरनी दैया साबर पढ़े है गै मारके मंतर पढ़ेय डैनियाँ छौड़ी गै
दैया इहो छौड़ी बंगालिन लेलही गै
आब बठैल ऽ दहिना भाग मे लेलही
बामा भाग में बघेसरि दैया लूकेसरी चललै गै आब डोका तऽ लहरनी लऽ के मंतर पढ़ेलयऽ गै
दैया मंतर पढ़ले गै।
आब मारि के महर आब माटि बरतनमा दैया खून चुबोलय गै।
आब केकर मारलय बेटा के आब
ककर पोता के दैया नाती के मारलय गै
आब सेहो काँनेय अंगनमा बथानमा
लेलही हँसैय दैया बघेसरि हँसैय गै
मैया आब चललै दैया लूकेसरी दैया गै।


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गाने का विवरण

मिथिला की भाव–भगैत गहबर गीत परंपरा में गीतों को सामान्यतः छह भागों में विभाजित किया जाता है। इनका आरंभ वंदना से होता है, जिसके बाद क्रमशः लोक-देवियों, लोक-देवताओं, नदी देवताओं, पशु - पक्षी देवता, तथा अंत में समगरदा गीत गाए जाते हैं। हालाँकि ये गीत अलग-अलग श्रेणियों के हैं, लेकिन सुमिरन के बाद इन्हें गाने का क्रम गायक की पसंद, अवसर या प्रसंग के अनुसार बदल सकता है।यह गीत लेल्ही देवी को समर्पित है, जिन्हें इस परंपरा में एक रक्षक और कल्याणकारी देवी के रूप में वंदित किया जाता है।

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