ताज़िया जुलूस – एक मधुबनी व्याख्या, मुहर्रम, खमाज, सांस्कृतिक सद्भाव, मिथिला लोककला
ताज़िया जुलूस – एक मधुबनी व्याख्या, मुहर्रम, खमाज, सांस्कृतिक सद्भाव, मिथिला लोककला
ताज़िया जुलूस – एक मधुबनी व्याख्या, मुहर्रम, खमाज, सांस्कृतिक सद्भाव, मिथिला लोककला

मुहर्रम से कुछ दिन पूर्व आरम्भ होने वाला यह सामुदायिक नृत्य–गीत प्रायः मुस्लिम पुरुषों द्वारा मंडलाकार खड़े होकर गाया–नाचा जाता है। हाथों में बाँस की बनी झररी लिए वे लयबद्ध आघात, सहज झुकाव और घूमते कदमों के साथ प्रश्न–उत्तर शैली में गीत प्रस्तुत करते हैं। स्वर, गति और ताल का ऐसा संगम बनता है कि अनेक हिंदू युवक भी भावपूर्वक इसमें शामिल हो जाते हैं। इन गीतों में हसन–हुसैन की करुण वीरगाथा गूँजती है। ताज़िया के इन गीतों को झरनी और मर्सिया भी कहा जाता है।

मुहर्रम से कुछ दिन पूर्व आरम्भ होने वाला यह सामुदायिक नृत्य–गीत प्रायः मुस्लिम पुरुषों द्वारा मंडलाकार खड़े होकर गाया–नाचा जाता है। हाथों में बाँस की बनी झररी लिए वे लयबद्ध आघात, सहज झुकाव और घूमते कदमों के साथ प्रश्न–उत्तर शैली में गीत प्रस्तुत करते हैं। स्वर, गति और ताल का ऐसा संगम बनता है कि अनेक हिंदू युवक भी भावपूर्वक इसमें शामिल हो जाते हैं। इन गीतों में हसन–हुसैन की करुण वीरगाथा गूँजती है। ताज़िया के इन गीतों को झरनी और मर्सिया भी कहा जाता है।

गीतों में

ताजिया

गीत योगदान करना पसंद करेंगे?

A person playing harmonium
A person playing harmonium
A person playing harmonium

कॉपीराइट © Khamaaj Foundation
सर्वाधिकार सुरक्षित
नियम और शर्तें | गोपनीयता नीति

विकसित और डिज़ाइन किया गया
डोपसोल स्टूडियो

कॉपीराइट © Khamaaj Foundation | सर्वाधिकार सुरक्षित
नियम और शर्तें | गोपनीयता नीति

विकसित और डिज़ाइन किया गया डोपसोल स्टूडियो

कॉपीराइट © Khamaaj Foundation | सर्वाधिकार सुरक्षित
नियम और शर्तें | गोपनीयता नीति

विकसित और डिज़ाइन किया गया डोपसोल स्टूडियो

Khamaaj brand logo in brand rust orange color
Hindi
Khamaaj brand logo in brand rust orange color
Hindi