


सामा-चकेवा
सामा-चकेवा
सामा-चकेवा कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी से पूर्णिमा तक मनाया जाने वाला एक लोकपर्व है। यह भगवान श्रीकृष्ण की पुत्री सामा की कथा पर आधारित है, जिन्हें झूठे आरोप में दोषी ठहराकर पक्षी बनने का श्राप दिया गया था। उनके पति चकेवा ने सत्य जानकर स्वयं भी पक्षी रूप धारण कर लिया। दोनों की पीड़ा से व्यथित सामा के भाई सांभ ने भगवान विष्णु से प्रार्थना की, और उनकी कृपा से सामा और चकेवा को पुनः मानव रूप प्राप्त हुआ। स्कन्द पुराण में उल्लिखित यह कथा भाई-बहन के स्नेह और सत्य की विजय का प्रतीक मानी जाती है।
सामा-चकेवा कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी से पूर्णिमा तक मनाया जाने वाला एक लोकपर्व है। यह भगवान श्रीकृष्ण की पुत्री सामा की कथा पर आधारित है, जिन्हें झूठे आरोप में दोषी ठहराकर पक्षी बनने का श्राप दिया गया था। उनके पति चकेवा ने सत्य जानकर स्वयं भी पक्षी रूप धारण कर लिया। दोनों की पीड़ा से व्यथित सामा के भाई सांभ ने भगवान विष्णु से प्रार्थना की, और उनकी कृपा से सामा और चकेवा को पुनः मानव रूप प्राप्त हुआ। स्कन्द पुराण में उल्लिखित यह कथा भाई-बहन के स्नेह और सत्य की विजय का प्रतीक मानी जाती है।
गीतों में
सामा-चकेवा
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