


चैतावर गीत चैत (मार्च–अप्रैल) महीने में गाए जाते हैं, जब बसंत अपने चरम पर होता है और प्रकृति नवजीवन की सुगंध से महक रही होती है। चैतावर गीतों में आम्र-मंजरियों की महक, कोयल की कूक, और वातावरण में घुली प्रेम की मादक तरंगें — सबका सजीव अनुभव मिलता है।
मूलतः ये प्रेमगीत हैं — जो संयोग और वियोग दोनों की भावनाएँ अभिव्यक्त करते हैं। जहाँ फाल्गुन गीत मिलन और उत्सव के उल्लास को मनाते हैं, वहीं चैतावर गीत विरह की तीव्रता और अंतःकरण की वेदना को स्वर देते हैं। “हो” और “हो रामा” की टेक इन गीतों को विशिष्ट लय और संगीतात्मकता प्रदान करती हैं।
चैतावर गीत चैत (मार्च–अप्रैल) महीने में गाए जाते हैं, जब बसंत अपने चरम पर होता है और प्रकृति नवजीवन की सुगंध से महक रही होती है। चैतावर गीतों में आम्र-मंजरियों की महक, कोयल की कूक, और वातावरण में घुली प्रेम की मादक तरंगें — सबका सजीव अनुभव मिलता है।
मूलतः ये प्रेमगीत हैं — जो संयोग और वियोग दोनों की भावनाएँ अभिव्यक्त करते हैं। जहाँ फाल्गुन गीत मिलन और उत्सव के उल्लास को मनाते हैं, वहीं चैतावर गीत विरह की तीव्रता और अंतःकरण की वेदना को स्वर देते हैं। “हो” और “हो रामा” की टेक इन गीतों को विशिष्ट लय और संगीतात्मकता प्रदान करती हैं।
गीतों में
चैतावर
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