


बसंत ऋतु में गाए जाने वाले बसंत गीत अत्यंत मादक और आकर्षक होते हैं। इनमें प्रेम, शृंगार और सौंदर्य रस का कोमल तथा काव्यात्मक वर्णन मिलता है। इन गीतों में संयोग (मिलन) और वियोग (विरह) — दोनों का अत्यंत कोमल और भावनापूर्ण चित्रण मिलता है। कई बसंत गीतों के अंत में “भनहि विद्यापति” का प्रयोग किया गया है, यद्यपि वे गीत वास्तव में विद्यापति द्वारा रचे नहीं गए हैं।
बसंत ऋतु में गाए जाने वाले बसंत गीत अत्यंत मादक और आकर्षक होते हैं। इनमें प्रेम, शृंगार और सौंदर्य रस का कोमल तथा काव्यात्मक वर्णन मिलता है। इन गीतों में संयोग (मिलन) और वियोग (विरह) — दोनों का अत्यंत कोमल और भावनापूर्ण चित्रण मिलता है। कई बसंत गीतों के अंत में “भनहि विद्यापति” का प्रयोग किया गया है, यद्यपि वे गीत वास्तव में विद्यापति द्वारा रचे नहीं गए हैं।
गीतों में
बसंत
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